।। जीवनी ।।

परम पूज्य श्री हितेंद्र कृष्ण जी महाराज: सनातन पथ प्रदर्शक एवं एक प्रसिद्ध श्रीमद्भागवत कथा वाचक
भारत, संतों और ऋषियों की पुण्यभूमि रही है, जहाँ ऐसे दिव्य विभूतियों का प्रादुर्भाव हुआ जिन्होंने अपना जीवन ज्ञान, भक्ति और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करने में समर्पित किया। इसी गरिमामयी व्यास परम्परा के रसमय वाहक हैं, परम पूज्य श्री हितेंद्र कृष्ण जी महाराज।
महाराज श्री अपनी अमृत वाणी और सरल व्याख्याओं से श्री हरि कथा, सत्संग, भजन एवं विभिन्न यात्राओं के माध्यम से सम्पूर्ण जगत में हरिनाम संकीर्तन के साथ-साथ सनातन धर्म की दिव्य परम्पराओं एवं वैदिक विज्ञान का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
📚 शिक्षा और दीक्षा: ज्ञान से भक्ति की ओर
महाराज श्री ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव से प्राप्त की और 10 वर्ष की आयु में आधुनिक ज्ञानार्जन हेतु माता-पिता के साथ ग्वालियर आ गए, जहाँ आपने 12वीं तक की शिक्षा (गणित विषय से) पूरी की। बचपन से ही आप चित्रकला, मूर्तिकला, पाककला, गायन, वादन, शास्त्र विद्या, मंत्र विद्या और आधुनिक उपकरणों की मरम्मत जैसे अनेक विषयों में अद्भुत प्रतिभा के धनी थे, वह भी बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के।
प्रसिद्ध व्याकरणाचार्य श्री दामोदर शास्त्री जी (धनेला वाले) द्वारा आपका यज्ञोपवीत संस्कार किया गया और गायत्री मंत्र की दीक्षा के साथ-साथ अति अल्प समय में ही आपको भागवत कथा का दिव्य ज्ञान प्रदान कर दिया। श्री कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति के परिणामस्वरूप आपने भागवत धर्म तथा अपनी संस्कृति के प्रचार-प्रसार की राह चुनी। श्रीधाम वृन्दावन की पावन भूमि में, अनन्य नृपति स्वामी श्री हरिदास जी महाराज की परंपरा में, टटिया स्थान में विराजमान पुज्य गुरुदेव 108 श्री राधा विहारी दास जी महाराज से आपने हरि नाम मंत्र दीक्षा ग्रहण की।
✨ दिव्य जन्म और दैवीय कृपा
श्री हितेंद्र कृष्ण महाराज जी का जन्म 30 जून 1995 (विक्रम संवत 2052) को सतयुग की गंगा कही जाने वाली पावन चम्बल नदी के समीप, वैष्णव भक्तों से सुशोभित ब्रह्मपुरी रामगढ़ में हुआ। आप ऐसे संत कुल में अवतरित हुए जहाँ परदादा बैकुंठवासी श्री मुरारी लाल मरैया माँ धूनी वाली कैला मैया के परम भक्त थे और दादाजी श्री बनवारी लाल मरैया त्रिकाल संध्या करने वाले परम वैष्णव भक्त थे। इन्हीं पुण्यात्माओं की भक्ति के परिणामस्वरूप श्री रामनिवास शर्मा जी और श्रीमती शारदा शर्मा जी को पुत्र रत्न के रूप में एक दिव्य बालक की प्राप्ति हुई।
शैशवावस्था में ही एक अदृश्य शक्ति के अनिष्ट से माँ धूनी वाली ने साक्षात प्रकट होकर आपकी रक्षा की और एक दिव्य तेज प्रदान किया। बाल्यकाल में ही आपको राधा रानी और श्री कृष्ण के साक्षात दर्शन हुए, जहाँ श्री कृष्ण ने स्वयं आपका हाथ पकड़कर हारमोनियम बजवाया। एक प्रकांड विद्वान ने अल्पायु में ही आपकी अलौकिक विशेषताओं को देखकर भविष्यवाणी की थी कि आप निकट भविष्य में एक महान प्रबुद्ध व्यक्ति के रूप में दुनिया भर को विस्मित करेंगे और समस्त विश्व में भक्ति, ज्ञान, विज्ञान तथा अध्यात्म के क्षेत्र में पताका लहराएँगे। इसी भविष्यवाणी के अनुरूप आपका नाम “हितेन्द्र” रखा गया, जिसका अर्थ है इंद्र का भी हित करने वाला अर्थात श्री हरि नारायण।
🌟 कथा शैली और युवा चेतना: Shri Hitendra Krishna Maharaj का उद्देश्य
श्री गुरुदेव के अनन्य प्रेम और आशीर्वाद से आपने अल्प समय में ही सम्पूर्ण श्रीमद्भागवत महापुराण का चिंतन-मनन कर उसे अपनी मधुर वाणी द्वारा भगवत प्रेमियों को रसास्वादन कराना आरंभ किया। आपकी कथा शैली इतनी अद्भुत और अलौकिक है कि भगवत प्रेम में विह्वल होकर आपकी आँखों से अश्रु धारा बहने लगती है, जिससे श्रोताओं को साक्षात भगवत लीला के प्रकट होने का अनुभव होता है। आप केवल कथा का प्रचार ही नहीं करते, बल्कि उसे अपने जीवन में भी उतारते हैं।
युवा पीढ़ी को अपनी स्वर्णिम संस्कृति और इतिहास से परिचित कराने तथा उनमें धर्म रक्षा की चेतना जागृत करने के लिए महाराज जी विशेष सेमिनार आयोजित करते हैं। आप युवाओं को मानसिक गुलामी से मुक्ति दिलाकर भारतीय होने पर गर्व करना सिखाते हैं और उन्हें झूठी आधुनिकता और शाश्वत सनातन धर्म में अंतर समझाते हुए यह बताते हैं कि कैसे हमारा सम्पूर्ण सनातन धर्म विज्ञान पर आधारित है।
🌍 'गुरु गृह सेवा धाम': एक दिव्य संकल्पना और Katha Vachak का मिशन
युवाओं को उनके जीवन की दिशा देने और उन्हें सनातन धर्म के विज्ञान को समझाने के लिए महाराज जी द्वारा ‘गुरु गृह सेवा धाम’ का निर्माण किया जा रहा है। यह स्थान आधुनिकता से परे, प्राचीन विज्ञान और संस्कृति का अनूठा संगम होगा, जहाँ कदम रखते ही मन और शरीर में आनंद की स्फूर्ति होगी। यह प्राचीन दिव्य वृन्दावन को धरती पर उतारेगा, जहाँ आकर आप अपने समस्त सांसारिक दुःखों से मुक्त हो आनंदमय जीवन जीने की कला सीखेंगे।
‘गुरु गृह सेवा धाम’ उस प्राचीन भारत को पुनः जीवित करेगा जहाँ के ऋषि-मुनि वैज्ञानिक थे, और जहाँ सनातन धर्म के उत्थान के लिए अनेक वैज्ञानिक अनुसंधान हुए थे। यहाँ प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक पद्धति, 64 कलाओं और वैज्ञानिक शिक्षा व्यवस्था का पुनः अनुसंधान, प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार किया जाएगा। महाराज जी का यह धाम सनातन धर्म से जुड़े प्रत्येक संस्कार और उसके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों से परिचित कराएगा, जिससे हमारी युवा पीढ़ी अपनी भारतीय विरासत पर गर्व कर सके और विश्व गुरु भारत के स्वप्न को साकार कर सके।
सत्य के प्रचारार्थ और सनातन संस्कृति के उत्थान हेतु ‘गुरु गृह सेवा धाम’ से जुड़कर आप निश्चित ही अपने जीवन में एक सकारात्मक दृष्टिकोण और जीवन जीने की अद्भुत कला सीखेंगे, जिससे धन कमाने के साथ-साथ सुखी गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होगा।









