शिव महापुराण का अलौकिक ज्ञान: महादेव की शरण में दुखों का अंत | श्री हितेंद्र कृष्ण जी महाराज
“कर्पूरगौरं करुणावतारं” – करुणा के सागर भगवान शिव की महिमा अनंत है। परम श्रद्धेय श्री हितेंद्र कृष्ण जी महाराज के अनुसार, शिव महापुराण केवल एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह साक्षात महादेव का शब्द-मय विग्रह है। जो भी भक्त सावन के मास में या सामान्य दिनों में भक्ति भाव से शिव पुराण का श्रवण करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के दरिद्र और पाप नष्ट हो जाते हैं।
शिव महापुराण सुनने के दिव्य लाभ (H2)
महाराज जी अपनी कथाओं में शिव तत्व की व्याख्या करते हुए बताते हैं कि महादेव ‘अशुतोष’ हैं, यानी वे बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देव हैं। शिव पुराण के श्रवण से प्राप्त होने वाले कुछ मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
असाध्य रोगों से मुक्ति: शिव पुराण की कथा और महामृत्युंजय मंत्र का प्रभाव तन और मन दोनों को निरोगी बनाता है।
कलह और अशांति का निवारण: जिस घर में शिव चर्चा होती है, वहाँ से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और पारिवारिक प्रेम बढ़ता है।
आत्मज्ञान की प्राप्ति: महाराज जी कहते हैं कि शिव का अर्थ ही ‘कल्याण’ है। उनकी कथा हमें वैराग्य और भक्ति का संतुलन सिखाती है।
पार्थिव शिवलिंग पूजन और महाराज जी का संकल्प (H2)
गुरु गृह सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से महाराज जी भक्तों को पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन के लिए प्रेरित करते हैं। महाराज जी का मानना है कि मिट्टी से बने शिव का पूजन करने से साधक को पृथ्वी पर ही स्वर्ग के सुख का अनुभव होता है। गुरु गृह सेवा धाम में समय-समय पर सामूहिक रुद्राभिषेक और शिव महापुराण की ज्ञान यज्ञ आयोजित किए जाते हैं, जहाँ भक्त महादेव की भक्ति में डूब जाते हैं।
महाराज जी का संदेश: हर हृदय में शिव (H2)
श्री हितेंद्र कृष्ण जी महाराज अक्सर एक बात दोहराते हैं— “शिव कहीं दूर कैलाश पर ही नहीं, बल्कि हर जीव के भीतर ‘शव’ को जीवित रखने वाले ‘शिव’ के रूप में विराजमान हैं।” यदि हम जीव मात्र पर दया करना सीख लें, तो महादेव की कृपा स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।
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वेबसाइट: www.hitendrakrishnji.info

